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सोमवार, 28 अप्रैल 2014

मानसिक नक़्शा --- परीक्षा

MIND MAP

परीक्षा

1.दीवानी पद की परीक्षा
 

2. उम्मीदवार आए, जिन्होंने अपने चरित्र को झूठे रुप में बढ़ा - चढ़ा कर दिखाने की कोशिश की।



3. पद के लिए आवश्यक दक्षता साहस, आत्मबल, दूसरों के प्रति दया की भावना, कर्त्तव्यपरायणता और उदारता हो तय।



4. दीवानी पं० जानकीनाथ को ही प्राप्त हुई, क्योंकि उनमें दया एवं आत्मबल  आदि का प्राधान्य था।



5. अतः लेखक
 दीवानी पद की परीक्षा के लिए 
आवश्यक गुणों को बताकर 
पाठकों को नैतिक ज्ञान में सफल हुआ है।

गुरुवार, 17 अप्रैल 2014

अपठित गद्या़ंश अभ्यास

निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा उसके नीचे लिखे प्रश्नों के उत्तर हिन्दी में लिखिए। उत्तर यथासंभव आपके अपने शब्दों में होने चाहिए -                                                           [2x5=10]    
किसी अमीर के घर में एक दिन धुँआसा साफ करने के लिए एक मजदूर लड़के को बुलाया गया। लड़का सफाई करने लगा। वह जिस कमरे का धुँआसा उतार रहा था, उसमें तरह-तरह की सुंदर चीजें सजी रखी थीं। उन्हें देखने में उसे बड़ा मजा आ रहा था। उस समय वह अकेला ही था, इसलिए प्रत्येक चीज को उठा-उठा कर देख रहा था। इतने में उसे एक बड़ी सुंदर हीरे-मोतियों से जड़ी हुई सोने की घड़ी दिखाई दी। वह घड़ी को हाथ में उठाकर देखने लगा।
घड़ी की सुंदरता पर उसका मन लुभा गया। उसने कहा – ‘काश!  ऐसी घड़ी मेरे पास होती।’ उसके मन में पाप आ गया, उसे घड़ी चुराने का मन किया, परंतु दूसरे ही क्षण वह घबराकर चिल्ला उठा – ‘अरे रे! मेरे हृदय में यह कितना बड़ा पाप आ गया। चोरी करते हुए पकड़े जाने पर मेरी बहुत ज्यादा दुर्दशा होगी। जेल जाना पड़ेगा और लोग हिकारत की नज़र से मुझे देखेंगे। ईमान तो जायेगा ही लोग अपने घरों में घुसने तक न देंगे। मनुष्य पकड़े न पकड़े ईश्वर की नज़र तथा हाथ से तो कभी छूट नहीं सकता।’ यों कहते-कहते लड़के का चेहरा उतर गया, उसका शरीर पसीने-पसीने हो गया और वह काँपने लगा। वह सिर थामकर दीनभाव से जमीन पर बैठ गया। और आँखों से आँसुओं की धारा बह चली। कुछ समय बाद अपनी मानसिक स्थिति सामान्य हो जाने के बाद उसने घड़ी यथा स्थान रख दी। उसने जोर से कहा- ‘लालच बहुत ही बुरी चीज है। इसने ही मेरे मन को बिगाड़ा है, पर दयालु भगवान ने मुझको बचा लिया। लालच में फँसकर चोरी करने की अपेक्षा धर्म पर चलकर गरीब रहना बहुत अच्छा है।’ चोरी करने वाला कभी निर्भय होकर सुख की नींद नहीं सो सकता, चाहे वह कितना ही अमीर क्यों न हो। चोरी का मन होने पर जब इतना मानसिक क्लेश होता है तो चोरी कर लेने पर पता नहीं कितना भयानक कष्ट उठाना और दुख झेलना पड़ता।                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      
        क) मजदूर लड़के को क्यों बुलाया गया? उसे अपना काम करने में मजा क्यों आ रहा था?  
ख) उसके मन में कब और क्यों पाप आया?  
ग) वह क्यों चिल्ला उठा और उसने अपने आप से क्या कहा?
घ) उसने किसका धन्यवाद किया और क्यों?
        ङ) ‘लालच’ के संबंध में उसके क्या विचार थे?